दर्पण प्रतिबिंब वह दृश्य है जो किसी वस्तु को दर्पण (शीशे) के सामने रखने पर बनता है। इस प्रक्रिया में वस्तु का बायाँ भाग दाईं ओर और दायाँ भाग बाईं ओर दिखाई देता है। इसे 'पाार्श्विक परिवर्तन' कहते हैं। कक्षा 7 के विद्यार्थियों के लिए यह विषय तर्कशक्ति विकसित करने में सहायक है। इसमें केवल दिशा बदलती है, वस्तु की ऊंचाई या ऊपर-नीचे की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता।
दर्पण प्रतिबिंब को समझने के लिए दर्पण को एक अक्ष की तरह मानें। जो हिस्सा दर्पण के जितना करीब होगा, उसका प्रतिबिंब भी उतना ही करीब बनेगा।
अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 9 दर्पण में पूरी तरह बदल जाते हैं, जबकि अंक 0 और 8 एक जैसे रहते हैं।
परीक्षा के दौरान यदि भ्रम हो, तो प्रश्न पत्र के पीछे उस आकृति को जोर से दबाकर पेंसिल से बनाएं। पन्ने को पलटकर देखने पर जो आकृति उभरेगी, वही दर्पण प्रतिबिंब होगी।
अक्सर छात्र 'B' और '8' के प्रतिबिंब में गलती करते हैं। ध्यान दें कि 'B' का बायाँ-दायाँ बदलता है, लेकिन '8' जैसा है वैसा ही रहता है।
दर्पण प्रतिबिंब में केवल बाएँ और दाएँ का स्थान बदलता है। ऊपर और नीचे का हिस्सा स्थिर रहता है। अभ्यास ही इसे समझने का सबसे अच्छा तरीका है।
