समांतर रेखाएं वे रेखाएं होती हैं जो एक ही तल पर स्थित होती हैं और उन्हें कितना भी आगे बढ़ाया जाए, वे कभी नहीं मिलतीं। जैसे रेल की पटरियां। जब एक तिर्यक रेखा (transversal) इन्हें काटती है, तो विशेष कोण बनते हैं।

समांतर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटती है, जिससे विभिन्न कोणीय संबंध बनते हैं।
समांतर रेखाओं को जब कोई तिर्यक रेखा काटती है, तो संगत कोण, एकांतर कोण और अंतः कोण बनते हैं। इन कोणों के बीच एक निश्चित गणितीय संबंध होता है।
दो समांतर रेखाओं के बीच की दूरी हमेशा समान रहती है। तिर्यक रेखा द्वारा बनाए गए संगत कोण आपस में बराबर होते हैं। एकांतर अंतः कोण भी समान होते हैं, जबकि एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है।
एक पार्किंग लॉट में दो समांतर रेखाएं हैं। एक कार तिरछी खड़ी है जो तिर्यक रेखा का काम करती है। यदि एक संगत कोण 65° है, तो दूसरा संगत कोण क्या होगा?
यदि समांतर रेखाओं को काटने वाली तिर्यक रेखा के एक ही ओर के दो अंतः कोण दिए गए हैं, और एक कोण 90° है, तो दूसरा क्या होगा?
1. 'F' आकृति: 'F' के कोनों के अंदर बनने वाले कोण 'संगत कोण' होते हैं और वे बराबर होते हैं।
2. 'Z' आकृति: 'Z' के मोड़ पर बनने वाले कोण 'एकांतर कोण' होते हैं और वे बराबर होते हैं।
1. जोड़ और बराबरी में भ्रम: विद्यार्थी अक्सर अंतः कोणों को बराबर मान लेते हैं, जबकि उनका योग 180° होना चाहिए।
2. केवल दिखने पर निर्भर रहना: रेखाएं समांतर हैं या नहीं, यह प्रश्न में पढ़ना जरूरी है, केवल देखकर अंदाजा न लगाएं।
समांतर रेखाएं कभी नहीं मिलतीं। संगत और एकांतर कोण बराबर होते हैं। एक ही ओर के अंतः कोण संपूरक (180°) होते हैं। याद रखने के लिए F, Z और C अक्षरों की आकृतियों का उपयोग करें।